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Motivational Story on Proud  in Hindi- Proud is a Great Enemy

प्रेरक कथा — अहंकार का फल

अहंकार की आग बड़ी प्रबल होती है। वह किसे जलाती है? उत्तर में एक तपस्वी की जीवन की घटना को देखा जा सकता है. पौराणिक काल की इस घटना में एक तपस्वी थे. उन्होंने प्रबल ध्यान और योग करके शक्तियां अर्जित की. अपनी योग शक्ति को वे इस ऊंचाई पर ले गए कि पानी पर चलने का अभ्यास करने लगे. उन्हें अहम हो गया.

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एक दिन देवर्षि नारद तक उनके तप और योग की बात पहुंची. नारद जी ने सोचा कि ऐसे तपस्वी से भेंट करनी चाहिए जो ईश्वर को प्राप्त करने के लिए इतना व्याकुल है. उन्होंने उनके आश्रम की राह ली. लंबी यात्रा के बाद वे तपस्वी के पास पहुंचे. नारदजी को तपस्वी ने देखा तो बैठे-बैठे ही उनसे कहा ‘आप भगवान से पूछकर आइयेगा कि मेरी मुक्ति कब होगी?‘

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नारदजी को उस अविनीत तपस्वी की धृष्टता पर पहले तो क्रोध आया लेकिन फिर उसकी तपस्चर्या को देखकर वे अपने क्रोध को पी गए. नारद जी ने मन में सोचा कि माना कि वह तपस्वी है, फिर भी उसे मेरा आतिथ्य-सत्कार करना चाहिये था. खैर वह अपने कर्तव्य का पालन न करे तो भी मुझे तो करना ही चाहिये. ऐसा मन में सोचते हुए नारदजी भगवान के पास पहुंचे और उनसे उस तपस्वी की मुक्ति के विषय में पूछा

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भगवान ने कहा कि मेरे पास विश्वकर्मा ने मोक्ष पाने योग्य व्यक्तियों की जो सूची पहुंचाई है उसमें उस तपस्वी का नाम ही नहीं है क्योंकि उसमें तीव्र अहंकार की आग है, जो उसकी तपस्या के फल को जला डालती है, जो अहंकारी होता है, वह दूसरों को तुच्छ समझता है. तप का अर्थ सिर्फ अभ्यास ही नहीं नियंत्रण भी है. जिसमें अहंकार है, वह भक्ति नहीं कर सकता.

Moral of The Story ​शिक्षा: अहंकार वह आग है, जिसमें व्यक्ति का विवेक जल कर नष्ट हो जाता है.
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